गरम मसाला

गरम मसाला

भारतीय मसालो मे गरम मसाले का महत्वपूर्ण स्थान है। गरम मसाले मे अनेक प्रकार के मसालो का मिश्रण रहता है, जो गरम होते है। इसी कारण इन्हे गरम मसाला कहते है। वैसे तो प्राचीन भारत के लोग मसालो का अधिक प्रयोग नही करते थे,परन्तु भारत मे मुगलो के आगमन के बाद गरम मसालो का प्रयोग बहुतायत से होने लगा। मुगल गरम मसालो का प्रयोग अत्यधिक मात्रा मे करते थे। जो भी हो गरम मसालो की उपयोगिता आज भी बरकरार है। इसके प्रयोग से भोजन स्वादिष्ट बनता है एंव पाचन क्रिया भी ठीक रहता है। परन्तु गरम मसाले का प्रयोग कम मात्रा मे करना चाहिए अधिक मात्रा मे इसके प्रयोग से नाना प्रकार के रोग उत्पन्न होते है।

हमारे समूह द्वारा दो प्रकार के गरम मसाले बनाये जाते है। एक सामान्य और दूसरा स्पेशल। सामान्य गरम मसाला सब्जी आदि के लिए ठीक रहता है जबकि स्पेशल गरम मसाला मंसाहार के लिए ठीक रहता है। वैसे आप दोनो का प्रयोग एक दूसरे पर कर सकते है।

घटक ( सामान्य गरम मसाला ) – जीरा, बड़ी इलायची, कालीमिर्च, सहजीरा, लौग, कलमीतज, सोठ, पीपर।

घटक ( स्पेशल गरम मसाला ) – जीरा, बड़ी इलायची, कालीमिर्च, सहजीरा, छोटी इलायची, जायफल, जावित्री, लौग, कलमीतज, सोठ, पीपर।

इन मसालो के परिचय, उत्पत्ति स्थान, पहचान, विभिन्न भाषाओ मे उनका नाम, गुण धर्म एंव उपयोग, रासायनिक संगठन आदि का वर्णन खड़े ( साबुत ) मसाले का प्रकरण मे किया गया है।

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