कलौंजी मसाला

कलौंजी मसाला

कलौंजी मसाला करैला,भिन्डी,परवल,बैंगन,शिमला मिर्च आदि सब्जियोें में भरा जाता है। यह मसाला हल्का भुना होता हैं। इसके लिए जिस सब्जी का कलौंजी आपको बनाना हो। उसे ताजा हरा लेकर साफ पानी से धुल लीजिए। अब चित्रानुसार सब्जी के बीच में लम्बाई की ओर से चाकू से एक तरफ काटिए। और उसे हल्के हाथ से दबाकर उसके भीतर का गूदा पतले चाकू से खुरचकर बाहर निकाल लीजिए। अब प्याज , लहसुन छीलकर बारीक काट लीजिए। इसे प्याज , लहसुन में कलौंजी मसाला , बारीक कटी हरी मिर्च, सब्जी के भीतर का निकाला गया गूदा, नमक, थोड़ा सरसों का तेल मिला दीजिए। कुछ लोग स्वादानुसार इस मिश्रण में अमचुर भी मिलाते है। और कुछ लोग तैयार कलौंजी पर ऊपर सें नींबू का रस या दही मिलाते हैं। मेरे विचार से अमचुर के स्थान पर नींबू का रस अधिक लाभकारी होता हैं। क्योंकि अमचुर त्रिदोषवर्धक होता हैं। जब कि नींबू रक्त में क्षारीयता ब बढ़ाता हैं। करैले की कलौंजी में आप अमचुर मिला सकते हैं।

मिश्रण तैयार हो जाने पर इसे सब्जी के भीतर खाली स्थान में भरिए और सूती धागे से बांध दीजिए ताकि मिश्रण बाहर न निकलने पाए। अब बर्तन में तेल गरम कीजिये और भरी हुई सब्जी उसमें बिछाकर बर्तन को किसी प्लेट या थाली सें ढक दीजिए। ऑच धीमी रखिए। थोड़ी देर बाद कलौंजी को पलट दीजिये ताकि दूसरी और भी वह पक जाए। लगभग आधे घंटे बाद बर्तन को आग से नीचे उतार लीजिए। कलौंजी तैयार है। सर्व करते समय इसका धागा खोल दीजिए। इसे रोटी, पराठा, पूड़ी या दाल चावल के साथ खाया जाता है। यदि कलौंजी के ऊपर दही डालना चाहते हैं, तो ताजी मथी हुई गाढ़ी दही डालनी चाहिए। इससे कलौंजी और भी स्वादिष्ट हो जाती है।

कुछ लोग कलौंजी को धागे से नहीं बांधते हैं। वैसे ही बनाते हैं। परंतु जब भी बांधिए शुद्ध सूती धागे से बांधिए या कच्चे धागे से बांधिए। यदि सूती या कच्चा धागा नहीं मिलता है, तो बिना बांधे ही बनाइए। कुछ लोग धागा न मिलने पर कलौंजी के कटे स्थान पर लोग को पिन के समान गाड़ देते हैं। ताकि मसाला बाहर न निकलने पाए। कलौंजी जी पलटने में थोड़ी सावधानी रखनी चाहिए। कलौंजी तेल में ही पकता है। इसलिए इसे बनाने में तेल कुछ अधिक लगता है।

कलौंजी मसाले में नमक, कुटी लाल मिर्च मिलाकर चाट मसाले के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं। ऊपर से आम इमली या टमाटर की चटनी भी डाल सकते हैं। इस मिश्रण को पानीपूरी मसाले के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। लाल भरवा मिर्च में भी यही मसाला भरा जाता है।

प्रयुक्त सामग्री – जीरा, मेंथी, मंगरैल, सौंफ, धनिया।
प्रयोज्य काल – 12 माह। बीच-बीच में धूप दिखाकर इसे कई वर्षों तक सुरक्षित रख सकते हैं।

195 comments

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